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शनिवार, 27 अगस्त 2016

वन विभाग और माइंस कंपनी के गठजोड़ से आरीडोंगरी में आठ वर्षों से हो रहा लौह अयस्क का अवैध उत्खनन




वन विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
कांकेर - रायपुर की एक माइंस कंपनी द्वारा ग्राम आरीडोंगरी में अवैध लौह अयस्क उत्खनन किया जा रहा है माइंस प्रबंधन को भारत सरकार पर्यावरण मंत्रालय दिल्ली के द्वारा लौह अयस्क उत्खनन के लिए जिले के आरीडोंगरी में वन क्षेत्र कंपार्टमेंट आरएफ ६०८ (पुराना कंपार्टमेंट १३९) के रकबा १०६-६० हेक्टेयर क्षेत्र में उत्खनन के लिए वर्ष २००८ में भूमि आबंटित किया गया आबंटित क्षेत्र का सीमांकन जीपीएस पाइंट डालकर स्पष्ट रुप से ए से लेकर एल तक कुल १२ बिन्दुओं पर दिए गए अक्षांश एवं देशांश के अनुसार निर्धारित भूमि पर ही खनन किए जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन माइंस प्रबंधन के द्वारा एचआईजे एवं के मध्य लगभग ६० हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध उत्खनन वर्ष २००८ से किया जा रहा है जो वन संरक्षण अधिनियम १९८० के तहत अपराध की श्रेणी में आता है इसकी जानकारी मिलते ही वनमंडलाधिकारी पूर्व वनमंडल द्वारा माइंस प्रबंधन को २३ जनवरी २०१५ को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए माइंस प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की बात कही गई थी लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई पर्यावरण एवं शासन को हो रही करोड़ों की क्षति को देखते हुए आरटीआई कार्यकर्ता राजेश रंगारी भानुप्रतापपुर के द्वारा आरटीआई के तहत निकाले गए दस्तावेजों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट के ग्रीन ट्रिब्यूनल खंडपीठ भोपल में याचिका दायर की गई जिसे गंभीरता से लेते हुए खंडपीठ के द्वारा अवैध उत्खनन कार्य के लिए संबंधित विभागों को नोटिस जारी करते हुए १५ सितंबर २०१६ तक अपने पक्ष रखने का समय दिया गया है जेसीबी मशीन से किया जा रहा उत्खनन वनमंडाधिकारी बीएस ठाकुर द्वारा तत्काल उत्खनन बंद कर तीन दिन के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने कहा गया लेकिन नोटिस दिए लगभग २० माह बीत जाने के बाद भी अभी तक माइंस प्रबंधन द्वारा ना ही काम रोका गया और ना ही जानकारी दी गई कार्रवाई होगी