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सोमवार, 1 अगस्त 2016

हरेली पण्डुम..

अमावस_तिहार 
नवा_भाजी_
हरेली_तिहार
हरेली_पण्डुम 
कुसीर_पोलहना

के लिए विशेष संकलन 

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*हर्र(गोण्डी भाषा में )*मतलब  रास्ता,  हरेली पण्डुम / कुसीर पण्डुम /जिरांग / दोबेंग पोलहना मतलब कोयापुनेम /प्रकृति मार्ग की ओर ले जाती तिहार है कोयतोरीन टेक्नालॉजी की वैज्ञानिकता को परिभाषित करती एक महत्वपूर्ण तिहार *स्वास्थ्य वर्धक जड़ी बूटियों कोयोकंद, शतावरी ,रसना* आदि के विशेष मिश्रण को एक साथ सभी बच्चों बड़ों व कोंदाल( बैल) जैसे पशुओं को एक साथ पूरे गोण्डवाना लेण्ड में  खिला कर दस्त, डायरिया, कमजोरी जैसे महामारियों को जड़ से उन्मूलन करने की उद्देश्य से किया जाता है। साथ ही रसना कड़ी के रस को सभी घरों व गाय बैल बकरी के कोठों में एक ही समय एक साथ छिड़काव की जाती है। यह रसना जड़ी कंद की मिश्रण को गांव के *गांयता* द्वारा जिम्मीदारीन याया को अर्जि करके सामूहिक रुप से एक साथ पकाया जाता है तदुपरांत सभी कोयतोरक को अल सुबह *गोटुल* प्रांगण से वितरित किया जाता है। इस जड़ी कंद को एक दिन पूर्व गांव के *कोपाल* द्वारा गाय चराते हुये जंगल से खोदकर संग्रहित किया जाता है। कोपाल को इसके एवज में प्रत्येक घर से एक पाहर का भोजन के बराबर राशन सामग्री भेंट की जाती है। *यह तिहार कोयतोरक की पहली तिहार होती है। यह तिहार कोयतोरक की सामुदायिकता की भावना व प्रकृति के साथ स्वास्थ्य व उपचार व बचाव तथा उसकी प्राकृतिक वैज्ञानिकता को बहुत करीब व सरल तरीके से प्रमाणित करती है।*  यह तिहार पूरे देश में किसी बीमारी की सामूहिक टीकाकरण करने के समान ही है जो गोण्डवाना लेण्ड में हमारे पुरखों ने हजारों वर्षों पूर्व से करते आ रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग कुछ दशकों से इसकी कापि पेस्ट की है जैसे पोलियो सामूहिक टीकाकरण । यह बीमारियों से बचाव हेतु जागरूकता महाभियान जिसमें वर्तमान की तरह भारी भरकम स्वास्थ्य महकमे व अरबों रुपये की बजट नहीं लगती है....इसी दिन से लिंगो पेन द्वारा बरसात के बाद उगी वनस्पतियों को उनकी औषधीय गुणों से उनके लयोरक शिष्यों को परिचित कराया जाता है इस तिहार के दिन से जिर्रा / दोबेंग जैसे पत्तेदार सब्जियों को अपने पेन पुरखाओं को अर्पित कर खाना शुरु किया जाता है । बरसाती कीड़ों मकोड़ों व जहरीले सांपों से बच्चों को बचाने भिमा लिंगो द्वारा आविष्कृत पवित्रतम  "गो" से *" गोण्ड़ोंदी" (गेड़ी)* में चलने की शुरुआत करते हैं ताकि कोया बच्चे इन कीड़ों से सुरक्षित रह सकें व संचारी रोगों से बचाव हो सके । फसलों को तनाच्छेदक व अन्य कीटों से बचाने के लिए पवित्रतम कोयतोरीन "को" वृक्ष *"कोहका(भेलंवा)"* जिसमें कि प्रतिकवक(antifungal) व प्रतिजैविक(antibacterial) की गुण होती है व ब्लैक शैडो जैसे कीट भक्षी चिड़ियों को आकर्षित करने पवित्रतम *"मड़दीमड़ा"* (साजा) की डंगाली धान के खेतों में गाड़ा जाता है ताकि फसलों में बीमारी व कीटों का प्रकोप ना हों । ( जैसा करने हजारों साल बाद भी आज के कृषि वैज्ञानिक अब सलाह देते हैं) कोया बच्चों को दिमागी रुप से सजग और पवित्र कोया पुनेमी  "को" से *"कोर्र घड़ी"* मतलब मुर्गे की अल सुबह प्रथम बांग के साथ टाइम सेट करने व अपने अनुमस्तिष्क को विकसित करने के लिए *लेसनी पन बिच्छू* से जहर इन्जेक्ट करना या *लहसुन* की कली से विशेष जगह पर आंका जाता है ताकि वह पहले से सजग व टीकाकृत होकर प्रखर बने। पवित्रतम कोंदाल के बछड़े को हल चलाने की प्रथम पाठशाला का गुर सीखा कर मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महान *कोंदाल* के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का तिहार है । दस्त में नमक की कमी होती है जो कि  बरसात में आम है नमक में *डांग कांदा* के पत्तों के साथ खिलाया जाता है ।कोयतोरिन अर्थतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गोण्डवाना के पवित्र *"गो" शब्द से निर्मित "गोण्डरी"* में उत्पादित फसलों में पल्लवित करने के लिए हर्बल  हार्मोन्स उत्प्रेरकों एवं हर्बल कीटनाशकों का एक साथ एक ही दिन और एक समय पर छिड़काव करने की प्राचीन तरीका हम गोण्डों के इन " कोयतोरीन टेक्नालॉजी " को विश्व को पुनः अध्ययन करना ही होगा  और विज्ञान को अपने बिना ब्रेक की गाड़ी को किसी कोयतोरक नार्र पर अटका कर अपने इतिहास की जड़ों में जाकर "कोयतोरीन सिस्टम " के वैज्ञानिकता की "क,ख,ग" पढ़ना पड़ेगा और नहीं तो प्रकृति की दिशा की उल्टी दिशा में चलने वाले लोगों को हमारी "कोयतोरीन टेक्नालॉजी " महज अंधविश्वास ही लगते रहेगी और प्रकृति यूं ही नष्ट होते रहेगी...

आप सभी कोयतोरक लयोरक लैया किसान कोपाल अवाल बुबाल आजोन सपाय कुन नावा कोया जोहारक ...सेवा जोहार ...अमूस तिहार ता वल्ले वल्ले सेवा आयी ....

 *आजो_नारायण_मरकाम, कोयतोरीन प्रकृति विद् व कोया पुनेम विद्, के द्वारा ... कोया पुनेम गोटुल कर्रसना करिहना के समय दी गई जानकारी ।*

*संकलन: माखन लाल सोरी द्वारा अमूस/ हरेली / जिर्रांग/ दोबेंग पोलहना तिहार की जानकारी हेतु कुछ अंश संपादित उपरान्त विशेष संकलित ।```_*

फोटो साभार: #किशोर_मण्डावी जी द्वारा व्हाटेपस के माध्यम से ।