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गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

बदहाली के आलम में संचालित कोरनहर का प्राथमिक पाठशाला...


शिक्षा व्यवस्था का ढोल पिटते सरकारी नुमाइंदे,

फ़ोटो Neeraj Tiwari

शिक्षा व्यवस्था के नाम पर कोरोंड़ो का बजट बनाकर शिक्षा व्यवस्था की ढोल  पिटते कंाकेर जिले के सरकारी नुमाइंदों को शायद आमाबेड़ा में स्थित कोरनहर का प्राथमिक पाठशाला नजर नही आता है,शासन -प्रशासन शिक्षा व्यवस्था के नाम पर लाख दावे कर रही हो, करोड़ो का बजट शिक्षा व्यवस्था के नाम पर खर्च किये जा रहे हो, लेकिन कांकेर  जिले में शिक्षा व्यवस्था की दूदर्शा दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। कंही स्कूल भवन नही, कंही शिक्षको को अभाव, तो कंही जर्जर स्कूल, कांकेर जिले के सुदूर आदिवासी अंचलों मे शिक्षा व्यवस्था सिर्फ कगजों तक सिमित रह गई है, शिक्षा के नाम पर इन क्षेत्रों मे सिर्फ लूट मची हुई । इसका ताजा प्रमाण  आदिवासी क्षेत्र आमाबेड़ा के ग्राम कोरनहर के स्कूल का है, स्कूली बच्चों के सिर से छत गायब है, कई स्कू ले तो झोपड़ी में संचालित होती है लेकिन ग्राम कोरेनार में भवन होते हुए भी भवन के ऊपर से छत गायब है बरसात,ठंण्ड हो या गर्मी कोरनहर के स्कूली बच्चें खुले आसमान के निचे शासन-प्रशासन की दी  गई शिक्षा व्यवस्था ग्रहण करते है। इन बच्चों की पढ़ाई व्यवस्था प्रशासन के लापरवाही की भें



ट चढ़ गई है, कोरनहर ग्राम में बनी प्राथमिक पाठशाला स्कूल भी राजीवगांधी शिक्षा मिशन के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है, जंहा स्कूल भवन बनाने में भी दिवार उठ़ा कर छोड़ दिया गया है।
               विदित हो कि कांकेर  जिले में एक स्क्ूल ऐसा भी है जंहा आरजीएम के पैसों से अफसर और कुछ शिक्षक भले ही लाल हो गए हों, लेकिन ग्रामीण इलाकों की दशा नहीं सुधरी.शासन प्रशासन बेहतर शिक्षा व्यवस्था के नाम लाख दावें करे सारे दावें को झुठलाते कोरनहर का यह प्राथमिक पाठशाला का स्कूल शासन-प्रशासन के शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख देती है। कंाकेर जिला मुख्यालय से ३० से ३५ किमी पर बसे आदिवासी बाहुल्य आमाबेड़ो विकासखंण्ड अंतागढ़ के कोरनहर का प्राथमिक पाठशाला में १२ बच्चें पढ़ते है, जिनकी पढ़ाई भगवान भरोंसे है, प्राथमिक स्कूल कोरनहर की भवन अत्यंत ही जर्जर स्थिती में है, ठ़ण्ड, गर्मी बरसात सारे मौसम में ये बच्चें खुले आसमान के निचे अपनी पढ़ाई पूरी करते है, शासन-प्रशासन के उदासीनता के चलते इनकी मजबूरी भी है? प्राथमिक पाठशाला कोरनहर में १२ बच्चों के लिए शिक्षक होते हुए भी शिक्षक नही है, इन स्कूली बच्चों का कहना है कि शिक्षक महोदय कभी आते ही नही है। शासन की मध्यान भोजन योजना भी कोरनहर के प्राथमिक पाठशाला स्कूल में लागू नही है। कोरनहर के स्कूली बच्चों की शिक्षा व्यवस्थ अंधाकार में है, जिनकी सुध लेने वाला ना तो कंाकेर जिले की प्रशासन है और ना शासन , बदहाली के बिच कोरनहर के स्कूली बच्चे अपना शिक्षा ग्रहण कर रहे है।