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रविवार, 5 जनवरी 2014

जि़ला पंचायत के ड्राइवर ने किया अग्रिस्नान.....


कांकेर की पहले से ही कुख्यात जि़ला पंचायत के माथे पर आज एक और कलंक तब लग गया जब सी.ई.ओ द्वारा प्रताडि़त तथा तीन माह से वेतन रोके जाने से परेशान इस कार्यालय के ड्राईवर ने आत्मदाह कर लिया। अभी वह जीवित है तथा उसे गंभीर हालत में रायपुर ले जाया गया है किन्तु प्रत्यक्षदर्शियों का कथन है कि सैयद रमज़ान अली नामक इस ड्राइवर का बचना मुश्किल है। उसके परिवार में पत्नी तथा चार छोटे-छोटे बच्चे हैं। पत्नी भी हृदय रोग से पीडि़त है। बताया जाता है कि प्रतिदिन हाजिर रहने तथा हाजिरी रजिस्टर में हस्ताक्षर होने के बावजूद इस ड्राइवर को सी.ई.ओ. द्वारा अनुपस्थित बताकर कारण बताओ नोटिस थमाए जाते थे जिससे उसे मानसिक परेशानी होती रहती थी और बिना कारण वेतन रोक देने के कारण आर्थिक रूप से भी त्रस्त था। ड्राइवर रमज़ान अली ने 2 नवम्बर को कलेक्टर कांकेर को भी इस संबंध में प्रार्थना पत्र दिया था जिसकी पावती संलग्र है। किन्तु कलेक्टर मैडम ने ड्राइवर द्वारा आत्महत्या की इस चेतावनी को कोई महत्व नहीं देते हुए सी.ई.ओ को उचित निर्देश नहीं दिए जिसके परिणाम स्वरूप इस नोटिस के दो माह दो दिन बाद ड्राइवर ने सचमुच अग्रि स्नान का कदम उठा लिया। 
रमज़ान अली अग्रि स्नान काण्ड के विषय में कलेक्टर श्रीमती अलरमेल मंगई डी को 2 नवम्बर 2012 को ही शिकायती पत्र दिया गया था जिसमें आत्महत्या शब्द भी उल्लिखित है लेकिन इस दो महीने के लम्बे अरसे में कलेक्टर ने इस विषय में कुछ नहीं किया। जहां तक कि उन्होंने पुलिस अधीक्षक को भी सूचित नहीं किया कि कोई आदमी आत्महत्या की बात लिखकर दे चुका है। जबकि पुलिस की सूचना देना नियमानुसार आवश्यक था।
अब कलेक्टर मैडम कहती हैं कि 
उन्हें रमज़ान अली का कोई पत्र नहीं मिला है । सच्चाई यह कहती है कि कलेक्टर कार्यालय में रमज़ान ने पत्र दिया था और कार्यालय का सील के साथ पावती भी मौजूद है। देखें स्केनिंग इसके बाद भी कलेक्टर मैडम कैसे इन्कार कर सकती हैं? या फिर मैडम को यह मानना पड़ेगा कि मैडम के आफिस में जिला पंचायत अधिकारी का कोई खास है, जो ऐसे पत्रों को दबाता है । 
जिला पंचायत के सी.ई.ओ. भीमसिंह कहते हैं कि 

ड्यूटी पर नहीं आता था, यहां सवाल उठता है कि ड्राइवर के हस्ताक्षर उपस्थिति रजिस्टर में कहां से आ गए ? इस पर भीमसिंह कहते हैं कि पीकर आता था, हमसे बदतमीजी करता था। यहां फिर सवाल उठता है कि जब आपके ही पूर्व कथनके अनुसार ड्राइवर ड्यूटी पर नहीं आता था, तो फिर पीकर आने और  बदतमीजी करने की बात कहां से पैदा हो गई ? स्पष्ट है कि या तो सी.ई.ओ. भीमसिंह का पूर्वकथन झूठ है या फिर पीकर आने की बात झूठ है। विरोधाभासी बयान कर भीमसिंह कहीं न कहीं तो सफेद झूठ बोल ही रहे हैं। इससे उक्त अधिकारी के मन की दुर्भावना ही प्रकट होती है। यदि उन्हें ड्राइवर से कोई शिकायत थी तो उसे सस्पेण्ड करना चाहिए था ना कि उसका वेतन रोकना था। 
                   
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि रमज़ान अली के पिता सैयद सत्तार अली यहां के मदर मेरी अस्पताल के सामने चाय की छोटी सी दुकान चलाते हैं। उनके पुत्र के साथ ऐसा हो जाने के कारण मुस्लिम समाज में भी आंतरिक रोष है। वाहन चालक संघ तथा अन्य यूनियनों ने भी सी.ई.ओ.के रवैये का विरोध किया है। लक्षण बता रहे हैं कि भविष्य में रमज़ान अली काण्ड के चलते कांके र में स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है ।



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