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सोमवार, 24 अगस्त 2015

छह आदिवासियों की डायरिया से मौत........

छुईखदान

 आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की ग्राम पंचायत सरोधी के अधीन आने वाले ग्राम नवागांव में इन दिनों डायरिया जमकर कहर बरपा रहा है। रोग के प्रकोप से अब तक छह बैगा आदिवासियों की जान जा चुकी है। वहीं हर घर में कोई न कोई बीमार होकर दर्द से कराह रहा है।



मिली जानकारी के मुताबिक गातापार आदि ग्रामों में इन दिनों मस्तिष्क ज्वर के प्रकरण भी सामने आ रहे हैं। कुछ मरीजों को उपचार के लिए स्थानीय सामुदायिक स्वास्थय केंद्र में भर्ती कराया गया था। पता चला है कि जब उनके परिजन उनसे मिलने आए तो स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ नसरें और कर्मचारियों द्वारा उनसे बदसलूकी की गई। इस संबंध में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के बीएमओ शेषराम मंडावी से जानकारी चाहा गया तो वह मिटिंग में होने की बात कहकर टाल गए। ज्ञात हो कि नवागांव में फैले डायरिया की जानकारी और मौत की जानकारी होने के बाद भी डॉक्टरों द्वारा अनभिज्ञता जाहिर किया जा रहा है।
बच्चे नहीं जा रहे स्कूल
राष्ट्रपति के दत्तक माने जाने बैगाजनों की जान बचाने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। मुख्यालय से मात्र 70-75 किमी की दूरी पर बीमारी ने पैर पसारने और छह लोगों की मौत से यह साफ है कि सरकारी प्रयास विफल रहा है। जानकारी के मुताबिक उक्त ग्राम में अब भी कुछ लोग पीड़ित हैं। कुछ का ईलाज जारी है। हालात ठीक होने तक बच्चों को स्कूल नहीं भेजने का निर्णय लिया गया है।
जानकारी के मुताबिक गत् 19 अगस्त को विकासखड चिकित्सा अधिकारी ने क्षेत्र का दौरा किया था और उसके बाद वह अवकाश पर चले गए। इस दौरान कुछ लोगों की मौत की जानकारी उन तक पहुंच चुकी थी। रोग प्रकोप के बाद भी सक्षम अधिकारी की तैनाती किए बिना वह किस आधार पर अवकाश पर गए यह समझ से परे है। एक-एक कर छह बैगा आदिवासियों की मौत की खबर सामने आने के बाद सरोधी से लेकर राजधानी तक प्रशासन हरकत में आया तब सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ डॉ. बघेल को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रवाना किया गया।



रोग के प्रकोप और मौत के बाद प्रशासन ने अब तक गांव और ग्रामीणों की सुध नहीं ली है। जानकारी के अनुसार ब्लॉक के अधीन आने वाले वनांचल की ग्राम पंचायत सरोधी के आर्शित ग्राम नवागांव में पिछले सप्ताह से डायरिया ने पैर पसार रखा है।



वर्तमान में स्थिति यह है कि हर घर में कोई न कोई रोग से पीड़ित है। बीते दिनों छह बैगा आदिवासी जिसमें सुकवारों पति घुसऊ, गेरूखदान से अपनी मां को देखने गया सुखऊ की मौत हो चुकी है। इसके अलावा बिसनीबाई पति जमोली, सुमरन, पायल पिता रामवतार, सलोनी पिता पल्टू 6 माह काल के गाल में समा चुके हैं।
हरिभूमि न्यूज. छुईखदान से साभार