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रविवार, 23 अगस्त 2015

जीरम घाट में शनिवार को ही होते हैं हमले.........

बस्तर |   दरभा के झीरम घाटी में 25 मई 2013 को हुई बड़ी वारदात को एक फिर माओवादी दोहराना चाहते थे। माओवादी वारदात को अंजाम देने पूरी तरह एम्बुश नहीं लगा पाए थे और एसटीएफ की टीम मौके पर पहुंच गई। एसटीएफ के जवान माओवादियों पर भारी पड़े। 500 की संख्या में होने के बाद भी माओवादी 80 जवानों को बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा पाए। घटना स्थल के पास मिले खून के धब्बों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि चार से पांच माओवादी भी मारे गए होंगे। हालांकि पुलिस ने माओवादियों का शव बरामद नहीं किया है।
मुठभेड़ में शामिल जवानों ने बताया कि एसटीएफ की दो कंपनी 8 वीं व 9 वीं के कुल 80 जवान जगदलपुर से बस में सवार होकर सुकमा जिले के दुब्बाकोंटा सर्चिंग में गई पार्टी को सपोर्ट करने निकले थे। रात करीब एक बजे एसटीएफ की टीम दरभा थाने पहुंची। दरभा थाने को पहले से सूचना मिल चुकी थी कि माओवादियों ने पेड़ काटकर व पुलिया क्षतिग्रस्त कर मार्ग अवरुद्ध कर दिया है। एसटीएफ की टीम को खतरों से अवगत कराने के बावजूद भी टीम के जवान सूझबूझ व साहस का परिचय देते, दरभा थाने से पैदल रवाना हुए।
थाने से करीब दो किमी दूरी पर माओवादियों ने दर्जनों पेड़ काटकर मार्ग बाधित कर रखा था। जवान पेड़ हटाने में लगे ही थे कि जंगल की ओर से अंधाधुध फायरिंग हुई। जवानों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए अदम्य साहस से माओवादियों का कड़ा मुकाबला किया। एसटीएफ के असिस्टेंट प्लाटून कमाण्डर कृष्णप्रसाद सिंह सड़क से माओवादियों की ओर आगे बढ़कर लेटकर फायरिंग कर रहे थे। इसी दौरान माओवादियों की ओर से आई एक गोली उनके सिर पर लगी और वे पीछे की ओर गिरकर शहीद हो गए। इस बीच एसटीएफ का जवान संतोष कुमार मोर्चा संभालते 20 फीट गड्ढेू में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
गोंडी में बात कर रहे थे माओवादी
बंजारिन मंदिर के छोटे पुजारी ने बताया कि रात करीब 10 बजे माओवादी मंदिर के आसपास पहुंचे थे। इनमें से एक माओवादी ने टार्च की रोशनी में मंदिर के भीतर घुसकर देखा। एक स्थान पर करीब 10 माओवादी पेड़ों की कटाई कर रहे थे। पेड़ काटने की आवाज सुनकर वह उठा और देखा कि माओवादी मंदिर के आसपास पूरी तरह फैले हुए हैं। माओवादी गोंडी में बात कर रहे थे, इसलिए उनकी बोली उसे समझ में नहीं आ रही थी। डर के कारण वह घर में कंबल ओढ़कर सो गया। माओवादी रात को इत्मीनान से घटनाओं को अंजाम देते रहे।
झीरम के सोलर लाइट गायब
ज्ञात हो कि दरभा के झीरम घाटी में 25 मई 2013 को हुई बड़ी वारदात के बाद क्रेड़ा विभाग ने सोलर सिस्टम लगाकर इसे रोशन किया था। करीब डेढ़ माह सेे क्रेडा द्वारा लगाई गई सोलर लाइट गायब है। झीरम घाटी के प्रारंभ से झीरम कैंप तक कुल 18 सोलर पोल से बल्ब गायब हैं। अब झीरम में रात को सफर करने से लोग कतराने लगे हैं। अंधेरे में माओवादियों को वारदातों को अंजाम देने में आसानी हो रही है।
जीरम घाट में शनिवार को ही होते हैं हमले
जीरम घाट में अब तक हुए हमलों पर यदि गौर किया जाए तो ज्यादातर हमले शनिवार को हुए हैं। 25 मई 2013 को हुए हमले का दिन शनिवार था। कल हुए हमले का दिन भी शनिवार ही था। इसके अलावा और भी कई छुटपुट वारदातें शनिवार को ही होती रही हैं।

सुधीर जैन
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