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रविवार, 18 मई 2014

आदिवासी बाहुल्य कोयलीबेड़ा की स्वास्थ्य सुविधा भगवान भरोंसे 8 में से 2 डाक्टरों की पद स्थपना वो भी 120 किमी दूर...



तामेश्वर सिन्हा     


 कांकेर- आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था भगवान  भरोसे चल रही है, कंही डाक्टरों की कमी तो कंही दवाईयों का टोटा, तो डाक्टर है तो बैठते नही है चरमाराती स्वास्थ्य सेवा का लाभ ले रहे आदिवासी। कोयलीबेड़ा तथा अंतागढ़ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में लंबे समय से एमबीबीएस डाक्टरों की कमी क्षेत्रवासी महसूस कर परेशानी झेल रहे है। लेकिन आज तक शासन-प्रशासन द्वारा इस जनहित के मसले पर कोई ठोस कदम नही उठाते हुए चिकित्सकों की पदस्थपनों को लेकर उदासिनता रव्वैया अपनाया जा रहा है सबसे बुरा हाल कोयलीबेड़ा क्षेत्र वासी परेशानी झेल रहे है जंहा दो डाक्टर तो है लेकिन अधिकतर १२० किमी दूर पखांजूर में मिलते है।

                जानकारी के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोयलीबेड़ा में ८ डाक्टरों की पदस्थपना की जानी थी लेकिन सिर्फ २ डाक्टरों की पदस्थना की गई है शेष ६ डाक्टरों का पद अभी भी रिक्त है, महिला डाक्टर एक भी नही है, दो डाक्टरों की पदस्थपना की गई है वो भी सामुदायिक स्थास्थ्य केन्द्र कोयलीबेड़ा में हमेशा नदारद रहते है और १२० किमी दूर पखांजूर में बैठते है कभी-कभी तो ऐसी नौबत आती है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोयलीबेड़ा मे ताला लटका रहता है और मरीजों का हाल-बेहाल रहता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोयलीबेड़ा में निम्र पदो की पदस्थपना की जानी है लैब टेक्रीशियन में २ पदो की भर्ती में १ पद खाली है, वंही स्टाफ नर्स का ७ पद खाली है। कोयलीबेड़ा वनांचलवासियों को स्वास्थ्य सेवा की चरमराती व्यवस्था के कारण स्वास्थ्य सेवा का लाभ नही मिल पा रहा है। यंही हाल अंतागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का है यंही १५ एमबीबीएस डाक्टरों की पदस्थपना होनी थी लेकिन दो डाक्टरों के भरोसे पुरा अंतागढ़ क्षेत्र वासी अपना काम चला रहे है। आदिवासी क्षेत्र अंतागढ़ तथा कोयलीबेड़ा क्षेत्रवासियों के साथ शासन प्रशासन का सौतेला व्यवहार क्यों? निभा रहे है समझ से परे है।  क्षेत्रवासी स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर दर-दर भटक रहे है।
उपस्वास्थ्य केन्द्र कोयलीबेड़ा 
उपस्वास्थ्य केन्द्र  निर्माण तीन साल हुए पर अभी भी लटका ताला
उप स्वास्थ्य केन्द्र कोयलीबेड़ा निर्माण को ३ साल हो गये लेकिन प्रशासन की उदासिनता के चलते आज भी वंहा ताला लटका मिलता है, आज भी यंहा स्वास्थ्य विभाग का विभाग नुमाइंदा नही बैठता है
जिससे आस-पास के गांव जिरामतराई के तीन पारा,गुटाकछार, सम्म्म्म्म्मबलपूर तथा कोयलीबेड़ा के बाजारपारा वासी बैगा गुनिया तथा क्षेत्र के झोलाछाप डाक्टरों के भरोसे अपनी जिंगदी दाव में लगा कर ईलाज कराते है इस क्षेत्र में झोलाछाप डाक्टर आदिवासियों की गाढ़ी कमाई लूटने मे लगे हुए है और इन सब की जिम्मेदार हमारा शासन -प्रशासन की उदासिनता के चलते हो रहा है।