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बुधवार, 9 जनवरी 2013

झलियामारी बलात्कार कांड





         
११ बच्चियों के साथ हुए बलात्कार के बाद क्या जागेगी, शासन-प्रशासन?
कई आश्रमों में अभी भी दहशद तथा खौफ के बिच जी रहे छात्राऐं। 


तामेंश्वर सिन्हा/ कांकेर जिला मुख्यालय से २० किमी दूर मानिकपुरी पंचायत का आश्रित आदिवासी बाहुल्य ग्राम झलियामारी, जिसकी आबदी५०० के आस-पास है। इन दिनों हैवानियत के शिकार हुए ११ नाबालिक आदिवासी बच्चियों के साथ दूराचार के मामले में काफी सूर्खीयों में है। झलियामारी ग्राम में आदिमजाति कल्याण विभाग द्वारा एक कच्चे मकान में बिना बाउण्ड्री वाल, बिना पेयजल की सुविधा, बिना सुरक्षा के बिच आदिवासी कन्या आश्रम संचालित हो रही थी। इसका परिणाम आज मिल रह है, ११ आदिवासी बच्चियों के बलात्कार के साथ। दिल दहला देने वाली घटना से पिडि़ता के परिजन सहम गये है...अब उनके परिजन झलियामारी आश्रम में रखने के लिए बिल्कुल तैयार नही है...और राज्य शासन को कोस रहे है।
             राज्यसभा सांसद मोहसिना किदवाई ने जब उक्त आश्रम का जायजा लेने झलियामारी पहुंची तो उनके जुबान रूके नही और उन्होने उक्त आश्रम को जानवरो के रहने लायक भी नही बताया। लेकिन ज्ञात हो कि उक्त आश्रम में आदिवासी बच्चियां रहती थी। ग्राम के सहयोग से बनी मण्डली में चल रही टूटू फुटे कच्चे मकान में आदिवासी बच्चियां अपना शिक्षा ग्रहण कर रही थी....११ आदिवासी बच्चियों के साथ हुए बलात्कार के मामले में शासन-प्रशासन के करोड़ो विकास कार्य झुठा साबित कर दिये । ग्रामिणों तथा आम जनता की जुबान पर एक ही सवाल है कि शासन का आदिवासी के विकास के नाम पर जो करोड़ो रूपये आते है आखिर वो कंहा जाते है? ये एक झलियामारी की कहानी नही है...ऐसे कई अन्य झलियामारी आश्रम और है..जंहा बच्चे अभी भी दहशत तथा खौफ के बिच पढ़ाई कर रही है...लेकिन शासन प्रशासन का कोई उचित ठोस कदम नही उठा पा रहीहै...शायद ११ आदिवासी बच्चियों के साथ हुए बलात्कार के मामले में शासन-प्रशासन जाग जाऐ।
                विदित हो कि ६ जनवरी २०१३ से चल रही झलियामारी बलात्कार कांड का आज ६ दिन है...कई कंाग्रेस के नेता, कई भाजपा के नेता..समाज सेवी सगंठन आदि ग्राम झलियामारी पहुंच रहे है..प्रत्येक दिन किसी की गिरफ्तारी तो किसी का बर्खास्तिगी चल रही है। लेकिन यह पर सवाल यह है कि ११ आदिवासी नाबालिक बच्चियां क्या यह घटना भुला पाऐंगी? उन पर क्या गुजर रही होगी, इधर कांग्रेस-भाजपा दोनो पार्टीयां अपने-अपने स्तर पर राजनिति कर रही है..रोजना किसी ना किसी पार्टी का बयान जारी हो रहा है...इस राजनिति के चलते कंही ये उन ११ बच्चियों के साथ हुए बलात्कार की घटना ना भुल जाऐ। जायजा लेने पहुंचे मोहसिना किदवाई के सामने ग्राम झलियामारी की कुछ ग्रामिणा महिलाओं ने अपना आक्रोश दिखाते हुए कंहा की आज लंबी-लंबी गडिय़ों, की लाईन लगी हुई है, उस वक्त कंहा थे जब उन आदिवासी बच्चियों को सुरक्षा की जरूरत थी..उन्हे बिजली पानी की जरूरत थी, अगर शासन हमें बता देती तो हम ग्राम की महिलाऐं आश्रम की बच्चियों की सुरक्षा करती। आज भाजपा-कंाग्रेस अनेक बयानबाजी कर रही है, अगर समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मोहय्ये करायी जाती तो क्या यह घटना होती....?
             उक्त आदिवासी कन्या आश्रम में हैवानियत के शिकर हुए ११ आदिवासी बच्चियों का मेडिकल पुष्टि हो चुकी है। कई बच्चियों का मेडि़कल कराया जाना है।  जानकारी के अनुसार आश्रम से दो बैच की बच्चियां आश्रम से निकल चुकी है। उनमें कई बच्चियां दूसरे आश्रमों में पढ़ रही है तो कई बच्चियां घरो में है...उन बच्चियों का भी मेडिकल परिक्षण होना चाहिए..लेकिन आश्रम से पुराने रिकार्ड नरहरपुर थाने ले आये है। जानकारी हो कि इस पुरे मामले को ग्राम पंचायत की सभा में ही निपटाने का प्रयास किया गया था..तथा पैसे का लेन-देन भी हुआ था। जिसके चलते आश्रम अधिक्षिका, उपसरपंच,वार्ड पंच को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है।
         मामले का खुलासा जिला कलेक्टर को शिकायत होने के पश्चात गुप्त रूप से जांच कमेटी बनाकर निरिक्षण में गये शैल ठाकुर ने किया...तथा उक्त शिक्षाकर्मी तथा चौकिदार के खिलाफ नरहरपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी। जिससे नरहरपुर पुलिस ने तत्काल उन्हे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जिला प्रशासन का यह कदम तारीफे काबिल है।
 हैवान थे उक्त आरोपी:- विदित हो कि आदिवासी बच्चियों के साथ बलात्कार करने वाले उक्त आरोपी हैवान थे.. जानकारी के अनुसार उक्त आरोपी शिक्षाकर्मी बरसात के दिनों में आश्रम में रूका करता था, जिसके बाद से ही उक्त आरोपी ने बच्चियों को अपने हैवानियत का शिक ार बनाना शुरू किया, आश्रम अधिक्षिका अन्य दूसरे कमरे में रूका करती थी। उसका फयदा चौकिदार तथा शिक्षाकर्मी उठाते थे, तथा लगातार नाबालिक बच्चियों के साथ बलात्कार करते आ रहे थे।