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गुरुवार, 4 अक्तूबर 2012

आदिवासी विनाशकाल रावघाट परियोजना: के लिए केन्द्र से पांचवी बटालियन की स्वीकृति


रावघाट क्षेत्र में चलता है छत्तीसगढ़ राज्य का शासन नही वरन् नक्सलियों का शासन...लेकिन बीएसपी का चाहिए हाल में रावघाट से लौह अयस्क...तभी तो अपने कुबेर का खजाना खोल कर लूटा रहे..और अपने खर्चे में सेना बुला रहे..। चाहे रावघाट से आदिवासियों की जिविका पर सीधा असर क्यों ना पड़े....और वे घर से बेघर क्यों ना हो जाऐ...लेकिन बीएसपी को हार हाल मे चाहिए  रावघाट से लौह अयस्क। इसीलिए तो नक्स्लियों से मुकाबला करने भारत के इतीहास में पहली बार किसी परियोजना को चालु करने के लिए पांचवी बाटालियन की जरूरत पड़ी..बीएसपी को लौहा लेना है खदान से...और सुरक्षा बलों को नक्सलियों से..नतीजा पीसेगें भोले-भाले क्षेत्र के आदिवासी? 

- भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि किसी प्रोजेक्ट को शुरू करने में पांचवी बाटालियन सुरक्षा बलों की जरूरत महसूस हो रही है...उस प्रोजेक्ट का नाम है वनवासी विनाशकाल रावघाट परियोजना। जानकारी के अनुसार स्टील ऑथारिटी ऑफ इंडिया लिमेटेड ने सुरक्षा कारणों की वजह से रावघाट परियोजना के लिए केन्द्र सरकार से सुरक्षा बलों से स्वीकृति ले ली है, क्योंकि जिस क्षेत्र में रावघाट परियोजना है वंहा पर नक्सलियों का साम्राज्य है, रावघाट क्षेत्र में छत्तीसगढ़ राज्य शासन नही वरन नक्सलियों का शासन चलता है। जाहीर सी बात है कि नक्सली ही भिलाई स्टील प्लांट के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। इसी वजह से बीएसपी द्वारा पांच बटालियन सुरक्षा बलों की स्वीकृति केन्द्र से अपने खर्चे पर करायी है। इन सुरक्षा बलों का सारा खर्च भिलाई स्टील प्लांट ही वहन करेगी। ये सुरक्षा बल हर पांच मीटर के दायरे में रह कर जान जोखिम तथा चुनौतियों का समना कर  लौह अयस्क का दोहन तथा परिवाहन में सहायता करेंगे।यहा गौर करने वाली बात यह है कि नक्सलियों को खात्मे के लिए बीएसपी ने कभी अपना कुबेर का खजाना नही खोला... मगर आज जब बीएसपी को लौह अयस्क की जरूरत पड़ी तो वे दिल खोलकर अपना धन लूटा रहे है। बीएसपी ने कभी नक्सली खात्मे के लिए सरकार को कोई विशेष पैकेज नही दिया, जबकि नक्सली कई वर्षो से इस क्षेत्र में मौजूद है और अपना पैर पसार कर पैठ बना चुके है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि सुरक्षा बल किसी संयंत्र को फयदा पहुंचाने के उद्देश्य से भेजी जा रही है। ना कि नक्सली खात्मे के लिए इससे साफ जाहीर होता है कि बीएसपी को हर हाल में अंतागढ़ खदान से लौहा लेना है। आज भिलाई स्टील प्लांट को जरूरत है लौह अयस्क की क्योंकि उनके संयंत्र की उत्पादन क्षमता में लौह अयस्क लगभग खत्म होने की कगार पर है। ऐसे में बीएसपी को हर हाल में रावघाट परियोजना को चालु करना है। रावघाट परियोजना उनकी मजबूरी है। मगर कैसे चालु किया जाए यह बीएसपी के लिए चिन्ता का विषय है। रावघाट खदान से ही लौहे की आपुर्ति बीएसपी को करनी है जिससे संयंत्र का काम व उत्पादन क्षमता सुचारू रूप से चल सके जिसके लिए बीएसपी हर संभव प्रयास कर रही है।