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बुधवार, 8 अगस्त 2012

ताला बंदी कर नगर पालिका ने नगर की जनता के सामने वर्चस्व प्राप्त किया,


 नगर पालिका द्वारा भी इसमें मिली भगत की आशंका जताई जा रही 
मामले को  नगर पालिका ने जी तोड़ मेहनत कर जमीन में दफन करने की कौशिश  की थी


 नगर पालिका आखिर कर बैंक खुलने से पहले ताला बंदी कर दी, और नगर की जनता के सामने वर्चस्व प्राप्त किया, मामला कोठारी ब्रदर्स द्वारा नगरपालिका की दुकान को बैंक प्रबंधन को नौ साल के लीज पर ३५०० रूपये किराये पर देने का था, जिसे कंाकेर पालिका ने जी तोड़ मेहनत कर जमीन में दफन करने की कौशिश की थी, लीजधारी ने अनुबंध शर्त का खुलेआम उल्लंखन किया था, जिस पर लगातार प्रहरी  द्वारा समाचार प्रकाशन कर पालिका की बेईमान निती के बारे में अवगत कराया गया था। जिस पर कंाकेर पालिका ने इस बेईमानी के दाग से बचने के लिए आखिर कर लीजधारी जो बैंक प्रबंधन को किराये पर दी गई थी उस पर ताला जड़ सील कर दिया गया।
        ज्ञात हो कि कंाकेर नगर पालिका द्वारा भी इसमें मिली भगत की आशंका जताई जा रही थी, सूचना का अधिकार जानकारी के तहत जानकारी में पालिका द्वारा दुकान को नियम पूर्वक देने का दावा कर रही थी, और किसी प्रकार के नियम का उल्लंखन से इंकार किया जा रहा था, लेकिन पालिका जागी और नोटिस देकर दुकान सील कर दिया गया। पालिका के किरायेदार आनंद गोपाल कोठारी ने मिडिया से रूबरू होते हुए बताया कि अम्बेडकर मार्केट में प्लाट २३/२४ पर १९८३ से लीज पर लेकर मैने २००४ में दुकान बनाया है। एग्रीमेंट के अनुसार मैने बैंक  को किराये पर दिया, तथा कांकेर पालिका द्वारा मुझे आन्नापत्ति प्रमाण पत्र में भी दिया गया है, जिस मैने नियम पूर्वक दुकान दी गई और किसी प्रकार का नियम का उल्लंखन नही किया गया है।

पालिका की दोहरी निती नगरवासियों के समझ से परे ?
कंाके र पालिका के नामचिन कर्णधरों की दो मुंह वाली बात नगर की जनता से समझ से परे है। कंाके र पालिका द्वारा पहले दो आन्नापत्ति प्रमाण पत्र दी जाती है और सूचना का अधिकार के तहत जानकारी दिया जाता है कि दुकान नियम पूर्वक दिया गया है, किसी प्रकार का नियम क ा उल्लंखन नही किया गया है, तथा समाचार पत्रों के प्रकाशन के बाद नोटिस देकर दुकान सील किया जाता है, यह निती कंाकेर पालिका के खिलाफ कई सुलगते सवालों को जन्म देती है, पालिका के नामचिन कर्णधार संदेह के घेरे में आते है, नगर की जनता पालिका की इस निती से समझ से परे है?।

पालिका के पूर्व सीएमओं तथा नामचिन कर्णधारों पर कार्यवाही क्यो नही़?
कंाकेर पालिका परिषद के बैठक मे पूर्व सीएमओं रमेश जायसवाल पर कार्यवाही की बात कहीं जा रही थी, अकेले सीएमओं को दोषी ठहरा दिया गया था, आखिर कर पालिका के नामचिन कर्णधारों पर क्यो कार्यवाही नही हो रही है? जबकि साफ है कि राजस्व निरिक्षक भी शामिल होगे लेकिन परिषद के बैठक में अकेले सीएमओं को दोषी ठकराया गया और कार्यवाही की बात कहने लगे। अभी तक लीजधारी के ऊपर ही कार्यवाही की गई है, बैंक प्रबंधन, तथा पालिका के नामचिन कार्णधारों के ऊपर किसी प्रकार की कार्यवाही नही की गई है, जबकि इस मामले में पूरी तरह से ये भी दोषी है।

विदति हो कि किराये में लिया हुआ कोई भी दुकान या मकान को किरायेदार किसी और को किराये पर नही दे सकता, ऐसा कानून भी है, इस प्रकार के कानून की खुलेआम धज्जीयां उड़ायी जा रही है, और किताबो के पन्नों में दफन किया जा रहा है। पालिका की जमीन को मामूली किराये पर लीज में लेकर हजारों रूपये के मासिक किराये पर बैंक को देने के मामले की जानकारी ऐसा तो बिल्कुल नही था कि कंाकेर पालिका को इसकी जानकारी नही थी, इस मामले की चर्चा तो नगर में आम हो चुकी थी, व्यापारी भी नगरपालिका से प्रत्येक तीन वर्ष में रिनेवल के शर्त पर १९८३ से उक्त जमीन को लीज में लेकर भवन बनाकर कब्जा होना स्वीकार रहें है। साथ ही नगरपालिका के अनुमति के बाद बैंक को देना बता रहे है। लेकिन बैंक  प्रबंधन द्वारा बैंक का काम चालु होने की बात कह रहे है, लेकिन जब किराये की जमीन को दुबारा किराये पर देने का प्रावधान ही नही है, तो बैंक प्रबंधन द्वारा इतनी बड़ी अनदेखी को क्या अंजाम दिया गया? बैंक प्रबंधन को जानकारी के बावजूद भी किराये तथा लीज पर दुकान ले लिया गया, भले ही कंाकेर पालिका द्वारा उक्त दुकान को सील कर अनुबंध निरस्त किया गया हो?।