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गुरुवार, 19 जुलाई 2012

रमन सरकार हौश में आवों..शिक्षक दो वर्न स्कूलों में ताला लगाओ: कोयलीबेड़ा के ग्रामीण




- केन्द्र शासन तथा राज्य शासन द्वार करोड़ो खर्च किया जाता है, शिक्षा व्यवस्था के नाम पर सरकार की कई योजनाएं संचालित है. लेकिन ये योजनाएं या तो कागजों में संचालित होती है या फिर सरकार के सरकारी नुमाइंदों शिक्षा व्यवस्था का मखौल उड़ा रहे है। शिक्षा व्यवस्था की पोल तब खुली जब सुदुर अंचल नक्सल प्रभावित क्षेत्र कोयलीबेड़ा ब्लाक के १४ ग्राम पंचायतों के बच्चों तथा पालक और ग्रामिणों ने अपनी ड़ुबती शिक्षा की नय्यै को बचाने के लिए विशाल रैली निकाल कर रमन सरकार को हौश मे आने को कंहा तथा स्कूली शिक्षा मंत्री को ब्लाक तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। 
  रमन सरकार हौश में आवों शिक्षक दो वर्न स्कूलों मे ताला लगाओं: कोयलीबेड़ा के ग्रामीण 








रमन सरकार को हौश में आवों के नारे के साथ ५९ ग्राम के स्कूली बच्चों तथा पालक संघ द्वार विशाल रैली निकाल कर शिक्षको की मांग की गई सरकार द्वारा स्कूल तो खोल दिया जाता है लेकिन शिक्षक नही दिया जाता है जिससे बच्चे कैसे पढ़ाई करेगे। कई स्कलें अभी भी कोयलीबेड़ा ब्लाक के ग्रामों में झोपड़ी में संचालित हो रही है.उन्हे अच्छी शला भवन प्रदान किया जाऐं..ग्रामिणों की मांग ऐ भी थी कि माध्यमिक उन्नयन शाला जो हाई स्कूल बनी है उसमें एक भी शिक्षक नही है..ग्राम सुलंगी, चारगांव,कौडोसाल्हेभाट, बढ़पारा, केसेकोडो हाई स्कूल में एक भी शिक्षक नही है.बच्चें पढ़्ाई कैसे करेगें तत्काल शिक्षको की नियुक्ति किया जाऐ, तथा जो शिक्षक बहार से आते है उन्हे आवासिय सुविधा दिया जाऐ। ग्रामिणों का कहना था की हम पांच साल से इस समस्या के बारे में अवगत करा रहे है लेकिन क्षेत्र के मंत्री विक्रम उसेंडी वन मंत्री, जिला प्रशासन आदि को पांच साल से इस समस्या के बारे में अवगत कराते आ रहे है लेकिन उनके द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई हमारी मांग अभी भी लंबित है अगर जल्द ही शिक्षा के प्रति अगर जिला प्रशासन तथा सरकार सचेत नही हुई तो उग्र आंदोलन किया जाऐगा तथा कोयलीबेड़ा के बच्चों के शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही का जिम्मेदार सरकार तथा प्रशासन होगी. ग्रामिणों तथा पालक संघ द्वारा १५ दिन का अल्टीमेटम दिया गया है।


झोपडिय़ों में संचालित हो रही स्कूलें
ब्लाक  के कई ग्राम कागबरस, आदि जो अभी भी झोपडिय़ों में संचालित हो रही है..सबसे खास बात यह है..शासन के सरकारी नुमाइंदे कागजों में इन स्कूलों का निर्माण कर चुके है लेकिन जमीनी हकीकत कु छ और ही है..कोयलीबेड़ा ब्लाक के ग्रामीण कुवंर सिंह उईके ने बताया कि सुदुर अंचल कोयलीबेड़ा ब्लाक के कई ग्रामों के बच्चे अभी भी झोपडिय़ों के शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर है. लेकिन मजबूरी के तहत वो जहर की खूंट पी रहे है ..बरसात के दिनों में तों शलाएं लगला काफी मुश्किल रहता है.तथा सभी ग्रामों में प्राथमिक शलाऐं खोली जाऐं..कई नदियां ऐसी है जो बारिश के दिनों में उफान पर रहती है..और चार-पांच दिनों तक हम स्कूलें नही जाऐं पाते..
           ग्रामिणों की अन्य मागों मे शालाओं में बाऊन्ड़ीवाल, पीने के पानी के लिए उचित सुविधा, खेल मैदान, शौचालय, मुत्रालय, तथा कोयलीेबेड़ा क्षेत्र के प्रत्येक पांच किमी की दूरी पर उप स्वास्थ्य केन्द्र हो तथा स्वास्थ्य केन्द्र में ३ स्वास्थ्यकर्ता उपलबद्ध करावें, आश्रम व छात्रवावों में पार्याप्त मात्रा के अनुसार अच्छे गुणवत्त युक्त भोजन बिस्तर की व्यवस्था कराए, एसटी,एससी के साथ ओबीसी को छात्रवृत्ती बढ़ा के ५०० रूपये दिया जाऐ, परिस्थिति को देखते हुए और अधिक आश्रमो की व्यवस्था किया जाऐ,ब्लाक मुख्यलय के सभी कर्मचारी तथा अधिकारी रहकर कार्य संचालन करे जो अभी नही हो रहा है, तथा अनेक मांग पालक संघ ग्रामीण द्वारा किया जा रहा है। इस विशाल रैली में १४ ग्राम के स्कूली बच्चों के साथ छात्र पालक संघर्ष समिति के कुउर सिंह उईके, लक्ष्मन सिंह,श्यामलाल, रामदेव,अमरसिंह आदि तथा ग्रामीण उपस्थित थे।