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मंगलवार, 3 जुलाई 2012

विपक्षी नेताओं के मौन रहने का राज क्या?


*मामला-नगरपालिका की दुकान को धनी सेठ द्वारा बैंक प्रबंधन को देने का..*


भाजपा नेता तथा पालिका के विपक्षी नेताओं के मौन रहने का राज क्या? क्यों भुमिगस्थ हो गये है विपक्षी नेता, पालिका का चुनाव आता है फिर भ्रष्टाचार खोजने में लग जाते है ये विपक्षी नेता तथा पार्षद सदेंह के घेरे में विपक्षी नेता?। चुप्पी का राज क्या? जबकि नगर वासी तथा इन विपक्षी नेताओं के सामने पालिका के नुमाइंदें मनमानी में लगे हुए है, हाल ही में शहर के धनी सेठ द्वारा नौ साल के लीज में इंडसइंड बैंक प्रबंधन को नगरपालिका की आबंटित दुकान को किराये में दे दी और यह विपक्षी पार्टी खामौश रही, आखिर खामौश रहने का कारण क्या है? जबकि नगर में तरह-तरह की चर्चाए पालिका के नियम कानूनों पर, जनता के साथ ठगी कर रही कंाकेर पालिका। विपक्षी नेताओं के सामने सभी अनियमितता और भ्रष्ट कार्यो को अंजाम दे रहा कंाकेर पालिका आखिर क्या कारण है विपक्षी नेताओं के चुप रहने का, अनेक अनकही सवालों को जन्म देता इन विपक्षी पार्टीयो के रवैय्ये से..?
 कांकेर पालिका ने अनुमति दी लीज तथा किराये पर देने की आबंटित दुकान को..- कंाकेर नगर में इन दिनों चर्चाए गर्म है की शहर एक धन्ना सेठ द्वारा नगरपालिका द्वारा आबंटित दुकान को, कंडीका तीन का हवाला देते हुए कंाकेर पालिका द्वारा धन्ना सेठ को दुकान को किराये तथा अनुबंध करने का अधिकार दे दिया गया, तथा शहर के एक हार्डवेयर व्यापारी विजय खटवानी द्वारा इसका विरोध करते हुए कंाकेर पालिका से सूचना का अधिकार के तहत जानकारी चाही गई, जिसमें पालिका ने जानकारी तैयार कर कुछ इस तरह से प्रस्तुत किया,जिसमें सीरीयल नम्बर तीन में उल्लेख है कि अनुबंध के शर्तो अनुसार लीजधारी किसी अन्य को किराये अथवा लीज पर नही दे सकता, अगर पालिका के अनुबंध शर्तो में यह नियम है तो पालिका द्वारा शर्तो के अधार पर पालिका ने लीज तथा किराया पर देने की अनुमति कैसे दे दी,? पालिका का असली चेहरा यही पर उजागर हो जाता है पालिका ने सूचना का अधिकार में खुद अपने जुबानी में कबुल कर चुकी है, लेकिन यह मामला नगर में गर्माने के बाद कंाकेर पालिका के नुमाइंदों द्वारा अब इसे दफन करने की साजिश रची गई, और औजार अपनाया गया कंडीका तीन का और सीरीयल नम्बर ४ में पालिका ने मान लीया की आबंटित दुकान का अनुबंध नियम अनुसार किया गया है, ये तो सभी नगर वासी भलीभांती जानते है की पालिका का नियम क्या है? किसी से कुछ नही छुपा है। 

धन्ना सेठों के लिए पालिका के नियम कानून बदले क्यों?
कंाकेर में स्थित आम्बेडकर मार्केट में २२ दुकाने स्थित है, और सब का अनुबंध एक ही प्रकार हुआ होगा, तथा नवीनिकरण भी समान हुआ होगा, लेकिन एक धन्ना सेठ के लिए नियम कानून क्यो बदली पालिका ने? बाकि २० दुकान के लिए वंही नियम और एक धन्ना सेठ के लिए पालिका का दुसरा नियम, क्या २० दुकान वाले पालिका के द्वारा आबंटित दुकान नही है? अगर है तो फिर पालिका का एक धन्ना सेठ के लिए नियम क्यों बदले? एक को दाल भात और एक को बीरयानी, मतलब जो ज्यादा पैसे देगा उसे बीरयानी मिलेगी..।

पालिका की आबंटित दुकान बैंक प्रबंधन को दे दी। 

नगरपालिका द्वारा स्थित आम्बेडकर मार्केट में आनंद गोपाल कोठारी के नाम पर आबंटित पालिका की दुकान को, लीज धारी ने बैंक प्रबंधन को किराये पर दे दीया है.. जिसे लेकर नगर में तरह-तरह की चर्चाए हो रही है इस दुकान को देने का विरोध नगर के व्यापारी विजय खटवानी ने किया तथा नगरपालिका से सूचना का अधिकार के तहत जानकारी चाही गई जिसमें पालिका नियम को गलत ठहरा रही है लेकिन कुछ कार्यवाही करने में असमर्थ है। कार्यवाही नही करने का कारण आखिर क्या होगा ये तो पालिका के सरकारी नुमाइंदे ही बता पाऐंगें? जबकि एक के लिए पालिका ने पुरी नियम को बदल दिया है और बाकि के लिए वंही नियम कानूून है। कांकेर पालिका में आज की स्थिति ऐसी निर्मित हो गई है कि यंहा सब जायजहै? मनमानी चरम सिमा पर है। 

विपक्षी पार्टी तथा नेताओं के चुप रहने का राज क्या?
कंाकेर पालिका में कांग्रेस पार्टी के पवन कौशिक अध्यक्ष है, उसमें से नगर में कई भापजा पार्षद प्रतिपक्ष नेता कई विपक्षी नेता है, पालिका की मनमानी सबकों दीखाई दे रही होगी, लेकिन इन विपक्षी पार्षद तथा नेंताओं के चुप रहने का राज आखिर क्या है? क्यों मौन धारण कर लिये गये है ये विपक्षी नेता तथा पार्षद? कई अनसुलझे सवालों को जन्म देता इनके चुप रहने पर, । और जैसे-जैसे पालिका का चुनाव नजदिक आता है ये विपक्षी नेता तथा पार्षद फिर पालिका द्वारा किये गये भ्रष्टाचार खोजने में लग जाते है, लेकिन उनके सामने कई तरह की पालिका की मनमानी इनको दिखाइ्र्र नही देता..और ना ही किसी तरह का अवाज उठाया जाता है.. मानो बिल मे खुस जाते है ये विपक्षी नेता।