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शनिवार, 9 जून 2012

नगरपंचायत केसकाल में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के पद का प्रभार ऐसे सख्स को सौंपा है जो तीन बार अपना नाम और शैक्षणीक योग्यता बदलकर तीन बार पदोन्नति अर्जित करने में कामयाब रहे |

Krishnadutta Upadhyay के फेसबुक वाल से साभार

छत्तीसगढ़ में भर्राशाही भ्रष्टाचार अफसरशाही को इस 


तरह से संरक्षण दिया जा रहा 

लगातार गंभीर आर्थिक अनियमितताओ के आरोपों में घिरे रहने के उपरान्त भी कोई प्रभावी ठोस कार्यवाही न करके पदोन्नति देने को लेकर विभाग के उच्च अधिकारियों पर भी ऊंगली उठाया जाने लगा है| केसकाल में पदस्थ होने के बाद से लगातार विवादों तथा आरोपों में बने रहने वाले परसराम के संबंध में नगर पालिका कांकेर – नगर पंचायत भानुप्रतापपुर –नगरपंचायत नरहरपुर –नगरपंचायत केसकाल तथा स्थानीय निधि संपरीक्षा के उपसंचालक कार्यालय जगदलपुर से सुचना के अधिकार तहत निकाले गए जानकारी में जो जानकारी प्राप्त हुई है वो विभागीय अंधेरगर्दी की पोल खोलने के लिए काफी है | नगरपालिका कांकेर में 28-10-1974 को फरसाराम योग्यता 8 वीं पास काम में भृत्य के काम में लगा था |जिसके बाद नगर पालिका कांकेर में मोहर्रिर पद का पहले समाचार पत्र में विज्ञापन निकाला गया परन्तु बाद में विभागीय पदोन्नति का निर्णय लिया गया और16-12-1987 को फरसाराम भर्ती फरसराम के नाम से मोहर्रिर पद पर पदोन्नति दे दिया गया |मोहर्रिर की जवाबदारी मिलने पर फरस राम ने जो आर्थिक अनियमतता किया उसे स्थानीय निधि लेखा संपरीक्षक ऍन.के.सोनी ने उजागर करते अपने प्रतिवेदन में बहुत तल्ख टिप्पणी किया फलस्वरूप परिषद निधि के दुर्विनियोग तथा वित्तीय अनियमितता के आरोप में आदेश क्र.107/स्था/99कांकेर दिनांक04-05-99 जारी कर निलम्बित कर दोया गया था|जिस पर विभागीय जांच दल गठित कर जांच कराया गया जिसके सामने फरस राम ने जांच अधिकारी के समक्षमता सभी के सभी आरोपों को स्वत:स्वीकार कर लिया था | आरोप लगने पर बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के संभावित राशि 9817=00 रुपया पालिका में संबंधित को गुमराह करके फरसराम द्वारा जमा क्र दिए जाने के उपरान्त भी आरोप सिद्ध हो जाने पर मोहर्रिर फरसराम को प्रेसिडेंट इन कौंसील की बैठक दिनांक 28-03-2000 को आगामी पांच वेतन वृदधि संचयी प्रभाव से रोकने की सजा दिया गया |इसके बाद भी यह अनुत्तरित बचा रह गया की आखिर उस समय लापता बताए गए रसीद बुकों का क्या हुआ |नगर पालिका कांकेर से इसी पद पर नगर पंचायत भानुप्रतापपुर स्थानान्तरण होने पर वंहा पर फरसराम ने जो किया बगैर उसकी समीक्षा किये और पिछले रिकार्ड पर ध्यान रखे जिला चयन समिति ने राजस्व निरिक्षक पद पर पदोन्नति की अनुशंसा कर दिया जिसे आधार मानकर नगर पालिका कांकेर में प्रेसिडेंट इन काउन्सिल ने दिनांक 10-12-2010 को प्रस्ताव क्र 8 पारित कर पदोन्नति करा दिया| नगरपंचायत भानुप्रतापपुर में उन्होंने क्या किया उसका बखान भानुप्रतापपुर के लोग आज भी करते हैं|भानुप्रतापपुर के लोंगो का अगर भरोसा न भी किया जाए तो वंहा के लेखा संपरीक्षा प्रतिवेदन में किये गए आर्थिक घोटालेबाजी अभिलेखी प्रमाणित कर सामने रख दिया है |छत्तीसगढ़ सासन के प्रमुख मुख्य सचिव –नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के मुख्य सचिव,संचालक –उप संचालक जिला के कलेक्टर से लेकर विभाग के मंत्री –मुख्यमंत्री तक को लिखित दस्तावेजी प्रमाण सहित सिकायत किया गया है पर विडम्बना की बात है
कि कई महीनों के बीत जाने के बावजूद कोई कार्यवाही की बात तो दूर रही जाँच भी आरम्भ नहीं किया गया| शासन या विभाग तीन बार नाम बदले जाने के कारण के सांथ बाद में पदोन्नति हेतु दिए गए 10वीं पास और12वीं पास के दिए गए प्रमाण पत्र की जांच कराते स्थानीय निधि संपरीक्षा के अंकेक्षण प्रतिवेदन को संज्ञान में लेकर नगर पंचायत केसकाल में सीधी भर्ती करने में,बगैर निविदा निकाले कराए गए निर्माण कार्यों,एवं केसकाल वासियों द्वारा भेजे गए शिकायतों की जांच करा लेवे तो दूध का दूध –पानी का पानी हो जाएगा |