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गुरुवार, 21 जून 2012

मौत का अशियाना बना जंगल विभाग के कर्मचारियों का निवास







मरम्मत का पैसा कहा जाता है* 
कंाकेर- सुभाष वार्ड स्थित वन विभाग के शासकिय अवास र्जर-र्जर हालत गंभीर हादसों को आंमत्रित करता, वनविभाग के प्रशासनिक अधिकारी करोड़ों रूपये डकार गये, कई वर्षो से विभाग द्वारा मरम्मत नही किया गया, मजबुरी मे गुजर बसर कर रहे वन विभाग के कर्मचारी, इसी स्थिति बनी हुई है कंाकेर शहर के सुभाष वार्ड स्थित वन विभाग के आवास गृहों का जो सालों से मतम्मत के अभाग में अत्यंत जर्जर हो गयी है। कर्मचारी जिन अवासीें में रह रहे है उन अवासों की  दशा दयनीय है घर के अन्दर सिमेंट तथा लकडी के पोल लगाकर छज्जों को सहारा दिया जा रहा हैै, दिवारें पुरी तरह टुट गई है, छजों के खपरेल टुट-फुट गये है, लकडीयों जो अवासें में लगी है दिमक खा कर टुट रही है, जो कभी भी गिर सकती है। अगर कभी हादया होता है तो इन सब का जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी होंगे। अधिकारियों का अवास छोड़ बाकी सभी कर्मचारी इन जर्जर अवासों में दुर्घटनाओं को आमंत्रित देते हुए निवास करते है। जब की वन विभाग के पास लकडिय़ो की कमी नही है फिर भी उन अवासें में लकडिय़ां टुट गई है जिनके मरम्मत का पैसा प्रशासनिक अधिकारी डकार गये है। इन शासकिय अवासों में मतम्मत का जो पैसा आता है वो कंहा जाता है, सालों से नही हुई मरम्मत के अभाव में ये जर्जर स्थिति पैदा हो गई है। सुभाष वार्ड फारेस्ट कालोनी में कई बार दुर्घटनाऐं भी हो चुकी है जिसमें एक कर्मचारी की जान बाल-बाल बच गई थी  तथा कई अवास अभी भी गिर कर खंडहर में तब्दिल हो चुकी है लेकिन वन विभाग के प्रशासनिक अधिकारियों का इन जर्जर अवासों पर ध्यान नही ज्यादा। वो तो अपने पक्के मकान में चैन से रहते है और इधर कर्मचारियों की जान के साथ खिलवाड करते रहते है।
  मिली जानकारी के अुनसार सुभाष वार्ड स्थित वन विभाग के अवासों की संख्या २० शासकिय अवास है। जिनमें वन विभाग के कर्मचारी अवास करते है। जिसकी हालत इतनीय दयनीय है कि कभी भी इन अवास धराशाही हो सकते है। बारिश के दिनों में कर्मचारी झिल्ली के पाल डालकर पानी से बचते है। इन अवासों में कई वर्षो से मरम्मत का काम नही किया गया है मरम्मत के नाम पर मात्र खाना पुर्ती के लिए बाहरी दिवालों की रंग-रोगन कर छोड़ दिया जाता है। ..